भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

छूना ही पाना है / बोधिसत्व

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

छूना ही पाना है
नाम लिखना ही पुकारना
याद करना ही मिलना है
दुराव ही घात है
भूलना ही मृत्यु है
अस्वीकार ही स्वतन्त्रता है
हाँ ही एक आकार होना है
सोचना ही जागना है
चुप रहना ही चुक जाना है
सहना ही मिटना है
निकलना ही चले जाना है
गुनना ही गाना है
छूना ही पाना है।