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छैला / चक्रधर बहुगुणा

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जिकुड़ि[1] धड़क धड़क कदी।
अपणि नी छ बाणी।।
छैला[2] की याद करी
उलरिगे[3] पराणी[4]।।

पखन जखन सरग[5] गिड़िके
स्यां स्यां के बिजुलि सरके
ढाडु[6] पड़ं तड़-तड़ के

रुण झुण के पाणी।।
छैला की याद करी
उलरिगे पराणी।।

बीच मुलक देश अहो
कनु कै जी ज्यू त सहो।
की जो क्या ब्यूत[7] कहो।

छि मैं छवीं[8] नि लाणी।।
जिकुड़ि धड़क धड़क कदी।
अपणि नी छ बाणी।।

छैला बणि की उदास,
लैंदी दौं गरम स्वास?
बणिगे तन को कबास[9],

कंदुड़ि[10] छन बयाणी[11]
छैला की याद करी
उलरिगे पराणी।।

हिर-हिर के बथो[12] औंद
क्वी नी पर खबर लौंद
कनु कै जी शान्त होंद

पापि यो पराणी?
धड़क धड़क जिकुड़ि कदी
अपणि नी छ बाणी।।

झट अब घर जौलो
इनु इनु वीं भेंट ल्यौलो
मन हे, तू क्यां कु लोलो

करदि काचि[13] गाणी?
छैला की याद करी
उलरिगे पराणी।।

घर की तू जोत छई
कुल मां उपोत छई
सुन्दर जनु फुलीं जई

छै तु दिल कि राणी।
जिकुड़ि धड़क धड़क कदी
अपणि नी छ बाणी।।

फ्यूली[14] की कली जनी
क्वां सो स्यो वदन तनी
औंदो हा याद जनी,

तरस दो पराणी।
छैला की याद करी
उलरिगे पराणी।।

डांड्यों[15] बसदी हिलांस[16]
रुकदो दौं किलै स्वांस
खांदी क्या चुचा, फांस?...

शब्दार्थ
  1. हृदय
  2. प्रियतम
  3. व्याकुल
  4. प्राण
  5. आकाश
  6. ओला
  7. बात
  8. बातें
  9. कपास
  10. कान
  11. गुनगुनाहट होना
  12. हवा
  13. कल्पना, कच्ची बातें
  14. एक फूल
  15. पहाड़ों
  16. पक्षी