भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

जंगल के झरने की धार / शीन काफ़ निज़ाम

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जंगल के झरने की धार
चाहा भर लूं बांह पसार

घने दरख़्तों की सिसकार
और नदी की एक नकार

बूंद नदी सागर संसार
पानी तेरे रूप हज़ार

वा कर आफ़ाक़ी आगोश
देख तो लूं क्या है उस पार

दहलीज़ों-दहलीज़ों तक
चलना थकना कितनी बार

दूर उफुक़ से फिर उभरी
कोमल काजल सी तलवार

जंगल में क्यूँ याद आये
अपने आँगन के असरार