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जद बात बिना सरै कोनी भायला / सांवर दइया

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जद बात बिना सरै कोनी भायला
पछै बात क्यूं करै कोनी भायला

म्हैं जाणू मन पांगळो हुवै इण सूं
म्हनै औ घी जरै कोनी भायला

आभै उडण री हूंस राखै जिका
पंख अडाणै धरै कोनी भायला

दीवै दांई जगण री तेवड़ लै
आंधी सूं बै डरै कोनी भायला

आ माटी चूंघावै जिकां नै दूध
जग हाथां बै मरै कोनी भायला