भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

जब मैं नष्ट हो जाऊँगी / रोज़ा आउसलेण्डर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जब नष्ट हो जाऊँगी मैं
चमकता रहेगा सूर्य तब भी
चलता रहेगा संसार-चक्र
अपने नियमों के अनुरूप
एक केन्द्र के चारों ओर
जिसे कोई नहीं जानता l

जगमगाती रहेगी हमेशा
कामिनी
बिखरता रहेगा बर्फ़ का
सफ़ेद प्रकाश l

जब मैं आगे बढ़ जाऊँ
अपनी भूली हुई पृथ्वी से
तब क्या तुम बोलोगे
मुझसे मेरा शब्द
थोड़ी देर के लिए ?

मूल जर्मन भाषा से प्रतिभा उपाध्याय द्वारा अनूदित