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जय जन्मभूमि! जय मातृभूमि! / नवीन चंद्र शुक्ल 'पुष्प'

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जय जन्मभूमि! जय मातृभूमि!
कीमती बलि दै केॅ आजादी लै केॅ लेलौं दम
आजादी के रक्षा करबोॅ सबके करम-धरम
देशोॅ के हर वासी लेॅ छै देशोॅ केरोॅ कसम
हुबेॅ नै देॅ है खंडित धरती रहतेॅ देहोॅ में दम

भारत के पावन धरती सें स्वर्गों भी छै कम
जेकरोॅ माँटी में है देहिया मिलतै बनी भसम
देशे के खातिर ही निकलै है देहोॅ सें दम
मातृभूमि के है माँटी में जन्मौं जनम-जनम