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जर्मनी के प्रति / बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’ / चार्ल्स हैमिल्टन सोरली

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तुम हमारी तरह अन्धे हो। तुम्हारी क्षति नहीं मानव निर्मित,
किसी ने भी तुम पर नहीं किया विजय का दावा।

हम दोनों भटकते अपने-अपने विचारों में क़ैद
टकराते आपस में, समझते नहीं एक-दूसरे को।
तुमने देखा केवल भविष्य की बड़ी योजना को,
हम रहे अपने मस्तिष्क के सँकरे गलियारे में,
हमने रोका एक-दूसरे के भले रास्तों को,
हम फुफकारते रहे, करते रहे नफ़रत।
और एक अन्धा लड़ा दूसरे अन्धे से।

जब होगी शान्ति, हम देख सकेंगे
हमें मिली नई आँखों से एक-दूसरे का सच्चा चेहरा
और करते रहेंगे आश्चर्य।
जब होगी शान्ति, हम होकर प्रिय, भले और स्नेहिल
मिलाएँगे गर्मजोशी से हाथ और हँसेंगे अपनी पिछली व्यथा पर।
लेकिन इस शान्ति के लौटने तक हैं
तूफ़ान, अन्धेरा, बिजली और बारिशें।

मूल अँग्रेज़ी से अनुवाद : बालकृष्ण काबरा ‘एतेश’