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ज़ेनिया एक-1 / एयूजेनिओ मोंताले

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मोस्का[1] उपनाम वाले नन्हे प्यारे कीड़े,
किसे पता है कि आज शाम, जब अँधेरा होने-होने को था
और जब मैं ड्यूटरो-इसाइया को घोखने में मश्ग़ूल था
मेरी बग़ल में तुम क्यों नुमूदार हुईं दोबारा,
लेकिन ऐनक के बिना तुम मुझे देख नहीं पाईं
और ऐनक की चमक के बिना
दाग़-दाग़ धुँधलके में मैं तुम्हें पहचान नहीं पाया ।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : सुरेश सलिल

शब्दार्थ
  1. कवि की पत्नी द्रुसिओल्ला तान्त्सी, जिन्हें लोग मोस्का के नाम से जानते थे।