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जाएगा किधर सम्त ए सफ़र भी तो नहीं है / शीन काफ़ निज़ाम

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जाएगा किधर सम्त ए सफ़र भी तो नहीं है
ठहरेगा कहाँ अब की शजर भी तो नहीं है

इक नाम भला सा था जिसे भूल चुके हैं
दस्तक कहाँ देनी है ख़बर भी तो नहीं है

जी में तो ये आता है ज़माने को ख़ुदा दें
इस बार मगर पास हुनर भी तो नहीं है

अजदाद के अस्त्रार रक़म कैसे करेंगे
साबित कोई शहरों में खंडहर भी तो नहीं है

जो बोलना जाने है वही बोल न पाए
उस शख़्स का अब शहर में डर भी तो नहीं है