भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

जाग नी मेरी बाल कन्या / पंजाबी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

जाग नी मेरी बाल कन्या,
जाग रुकमणी राणीये।
कीकण जागां मेरेया भोलेया लोका,
कीकण जागां मेरेया लखेया देसा,
बाबल तां वर घर नहीं लेआयेया,
बाबल तेरा दान करदा,
लै गडवे इशनान करदा,
मोतियाँ बाबल चौक पूरदा,
बाबल तां वर घर लै आयेया।
 
जाग नी मेरी बाल कन्या,
जाग रुकमणी राणीये।
कीकण जागां मेरेया भोलेया लोका,
कीकण जागां मेरेया लखेया देसा,
भईया तां दाजो नहीं लैआएया
भईया तेरा दान करदा,
लै गडवे इशनान करदा,
मोतियाँ भईया चौक पूरदा,
भईया दाज लै के आयेया ।
 
जाग नी मेरी बाल कन्या,
जाग रुकमणी राणीये।
कीकण जागां मेरेया भोलेया लोका,
कीकण जागां मेरेया लखेया देसा,
चाचा तां गुलियान नहीं लैएया
चाचा तेरा दान करदा,
लै गडवे इशनान करदा,
मोतियाँ चाचा चौक पूरदा,
चाचा गुलियान लै आयेया।
 
जाग नी मेरी बाल कन्या,
जाग रुकमणी राणीये।
कीकण जागां मेरेया भोलेया लोका,
कीकण जागां मेरेया लखेया देसा,
मामा तां चूड़ा नहीं लेएया।
मामा तेरा दान करदा,
लै गडवे इशनान करदा,
मोतियाँ मामा चौक पूरदा,
मामागु चूड़ा लै के आयेया।