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जानता हूँ, फिर भी / जय गोस्वामी / रामशंकर द्विवेदी

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समुद्र के किनारे
बालू पर
अपनी अँगुली से लिखता हूँ
तुम्हारा नाम
बड़े जतन से

थोड़ी देर बाद
लहर आएगी
धुल जाएगा
ठीक है ।

पता है
फिर भी लिखता हूँ,
लिखता रहता हूँ बार-बार
तुम्हारा नाम —

मूल बाँगला भाषा से अनुवाद : रामशंकर द्विवेदी