भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

जायसी री पीड / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

म्हैं काळो
म्हैं काणो
म्हैं कोझो

थांनै हंसता देखूं तो लखावै
हाल मरियो कोनी
शेरशाह

म्हैं माटी हो कदै ई
इण गय सूं पैली
जाणता हुवोला थे ई
रचना पड़रूप हुवै सिरजणियै रो

म्हारी कणाई
म्हारी कोजाई
उणियारो है बींरो ई !