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जा बेटा पूरनमल घर नै बण ज्या शुभ घरबारी / मेहर सिंह

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ले कै जन्म फेर आना ना बात बता दूं सारी,
जा बेटा पूरनमल घर नै बण ज्या शुभ घरबारी।टेक

सत्संग तै हो छोटा बड़ा सत्संग ठीक पकड़िए,
मात-पिता और गुरु कै आगै कदे भी ना अकड़िए,
गुरु आज्ञा का पालन करिए शुभ करमा पै अडिए,
गऊ ब्राह्मण अतिथी की सेवा तै तूं कदे भी ना चिड़िए,
घर आए का आदर करिए नर आवै चाहे नारी।1।

मद नै मारीए क्रोध करैगा रहैना जी नै रासा,
लोभ तजे तै काम मरै जो तेरे खून का प्यासा,
मोह तज दे तै आनन्द छाजा, छुटै नरक तै बासा,
इन पांचां तै बच कै रहिए फिर कांहे की ना शांसा,
सत चित आनन्द ग्रहण करै तू खुद भी सै ब्रहमचारी।2।

या त्रिया बड़ी दुरंगी हो सै तनै इंच-इंच नापैगी,
सुण लिए सारी करीए मन की ना गलत जगह छापैगी,
चाहे पेट पाड़ कै दिखा दिए बेईमान नहीं धापैगी,
तूं गोरख-गोरख जपै गया तै या दूर खड़ी कांपैगी,
मनै बचन दे दिया तनै जाणा होगा ना तै या खाकै मरैगी कटारी।3।

तूं राजा या रईत सै तेरी इसका तूं मालक सै,
हित से रक्षा कर प्रजा की क्यूंकी तू पालक सै
जिवंते रहे तै फेर मिलैंगे ना तै म्हारा तेरा के तालक सै,
लखमीचन्द कहै मौज कर बैटा ईश्वर सबका खालक सै,
मेहर सिंह की लाज राखीए बण कै आज्ञाकारी।