भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

जिंदगाणी : दो रूप / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कठैई तो
भाख फाटतां ई
सोनलिया किरणा में
गुलाब रै फूलां माथै दमकतो
       टोपा-टोपा ठैरियोड़ो पाणी:
               आ जिंदगाणी !

अर कठैई
अभावां री भट्टी में
नितूकी जरूरतां रै तवै माथै
         टोपा-टोपा पड़तो पाणी:
               आ जिंदगाणी !