भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

जीते जी ये रोज़ का मरना ठीक नहीं / मदन मोहन दानिश

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जीते जी ये रोज़ का मरना ठीक नहीं ।
अपने आप से इतना डरना ठीक नहीं ।

मीठी झील का पानी पीने की ख़ातिर,
उस जंगल से रोज़ गुज़रना ठीक नहीं ।

कुछ मौजों ने मुझको भी पहचान लिया,
अब दरया के पार उतरना ठीक नहीं ।

रात बिखर जाती है दिन की उलझन से,
रात का लेकिन रोज़ बिखरना ठीक नहीं ।

वरना तुझसे दुनिया बच के निकलेगी,
ख़ुद से इतनी बातें करना ठीक नहीं ।

सीधे सच्चे बाशिंदे हैं बस्ती के,
दानिश इन पर जादू करना ठीक नहीं ।