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जीवण खातर अबै नुंवी रास लै तूं / सांवर दइया

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जीवण खातर अबै नुंवी रास लै तूं
नित आगै बध, जठै मिलै उजास लै तूं

सांमै सीयाळो अर कनै कोनी गाभा
छाती में गोडा घाल गरमास लै तूं

आ ना सोच कै थारी’ज आंख्यां आली
आखो जग आंसुवां रो इतिहास लै तूं

दो-च्यार होठां माथै मुळक तो कांई
अलेखूं उणियारा अठै उदास लै तूं

ऐ स्सै सांसां टुर जासी थारै लारै
पैली इण माटी रो विश्वास लै तूं