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जुदाई / इक़बाल

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जुदाई

सूरज बुनता है तारे ज़र से
दुनिया के लिए रिदाए-नूरी [1]


आलम है ख़ामोश-ओ-मस्त गोया
हर शय की नसीब है हुज़ूरी

दरिया कोहसार[2] चाँद- तारे
क्या जानें फ़िराक़ो-नासुबूरी

शायाँ[3] है मुझे ग़मे-जुदाई
यह ख़ाक है मरहमे-जुदाई
 

शब्दार्थ
  1. रोशन चादर
  2. पर्वत
  3. अभीष्ट