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जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ / लैंग्स्टन ह्यूज़ / अमर नदीम

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यह एक लम्बे अरसे पहले देखा था
मैं तो लगभग भूल ही चुका था अपने सपने को।

पर तब तो वह
मेरे सामने था
सूरज-सा चमकदार
मेरा सपना।

और फिर दीवार उठने लगी
उठने लगी धीरे-धीरे,
धीरे-धीरे।
मेरे और मेरे सपने के बीच में
उठती रहे जब तक कि उसने आकाश नहीं छू लिया।

यह दीवार
मैं इसकी छाया।

मैं काला (नीग्रो)
पड़ा हुआ हूँ इस छाया में।

मेरे सपने की रोशनी नहीं है अब मेरे सामने,
और मेरे ऊपर।
सिर्फ़ एक मोटी दीवार,
सिर्फ़ एक छाया।

मेरे हाथ !
मेरे काले हाथ !
दीवार को भेद कर
खोज लेते हैं मेरा सपना !
और मेरा साथ देते हैं
इस अन्धेरे को चकनाचूर करने में,
इस छाया को तोड़कर,
हज़ार सूरजों के प्रकाश में,
सूर्य के
हज़ारों-हज़ार जीवन्त सपनों में
बदलने में।

मूल अँग्रेज़ी से अनुवाद : अमर नदीम