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जो कुछ मैंने कहा सब वापस लेता हूँ / निकानोर पार्रा / उज्ज्वल भट्टाचार्य

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मेरे जाने से पहले
एक आख़िरी ख़्वाहिश मानी जानी चाहिए :
हे उदार पाठक !
इस किताब को जला दो ।
 
यह कतई वह नहीं
जो मैं कहना चाहता था
हालाँकि इसे ख़ून से लिखा गया
यह वह नहीं जो मैं कहना चाहता था ।
 
मुझसे बदतर क़िस्मत
किसी की नहीं हो सकती
मेरे साये ने मुझे मात दे दी :
मेरे अलफ़ाज़ ने मुझसे बदला लिया ।
 
माफ़ कर देना, पाठक !
मेरे अच्छे पाठक !
अगर मैं विदा नहीं ले पाता
तुमसे गले मिलते हुए,

तो फिर विदा लेता हूँ
एक फीकी ग़मगीन मुस्कान के साथ ।
 
शायद इतना ही मैं हूँ
लेकिन
मेरी आख़िरी बात सुन लो :
जो कुछ मैंने कहा
सब वापस लेता हूँ
दुनिया के बेइन्तहा कड़वेपन के साथ
जो कुछ मैंने कहा
सब वापस लेता हूँ ।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : उज्ज्वल भट्टाचार्य