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जो दिल में हौसला होता तो ये अंजाम ना होता / रवि सिन्हा

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जो दिल में हौसला होता तो ये अंजाम ना होता
जो होता सर में सौदा[1] तो ये सर नाकाम ना होता

ये उल्फ़त[2] है के मजबूरी, हुए रुस्वा[3], चले जाते 
न कूचे में यहाँ फिरते न उनका सामना होता 

तमाशा मेरे आगे है तमाशा तेरे आगे भी 
जो तेरा दख़्ल कुछ होता मिरा कुछ काम ना होता 

बजा[4] ताकीद क़ुदरत की कि वो भी फ़र्दे-वाहिद[5] है  
मगर हमराज़ तो होता भले हमनाम ना होता 

ज़मीं से ज़ह्र पीते हैं जड़ों को खोद ही देते
अगर मिट्टी बदल देना शजर[6] का काम ना होता

चली है रस्म कुछ ऐसी अब इस तर्ज़े-हुकूमत में
के वो बदकार[7] ना होता तो उसका नाम ना होता

जो दुश्मन बा-अदब होता तो हम तेग़े-सुख़न[8] लेकर 
उसी के सामने होते उसी से सामना होता

शब्दार्थ
  1. इश्क़ (love)
  2. मुहब्बत (love)
  3. बदनाम (disgraced)
  4. मुनासिब (appropriate)
  5. अकेली शख़्सियत (unique individual)
  6. पेड़ (tree)
  7. दुष्ट (wicked)
  8. कविता की तलवार (the sword of poetry)