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जो हैं बेरहम, उन पर न कुछ रहम कीजिए / सांवर दइया

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जो हैं बेरहम, उन पर न कुछ रहम कीजिए।
आदमी के दुश्मनों की खबर अब लीजिये।

खुद फंसे तो गिड़गिड़ाना है आदत उनकी,
हाथ आया वक्त न यूं ही जाने दीजिये।

आग भड़कते ही खौफ़ खायेंगे सितमगर,
तबीयत से इन अंगारों को हवा दीजिये।

फरियाद करते तो हो गया एक ज़माना,
अब हलक़ में हाथ डाल अपने हक़ लीजिये।

गिरे इमारते-जुल्म, एक हो लड़े तिनके,
भोर का ढंग यही, इतिहास देख लीजिये।