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तनि जिराय लेॅ / कनक लाल चौधरी ‘कणीक’

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बड्डी काम करने छोॅ तनि जिराय तेॅ लेॅ
बड्डी दौड़लोॅ छो तनि थिराय तेॅ लेॅ।

नैं जिरैभौ तेॅ केना केॅ फिन आगू बढ़भौ
जे छुटलोॅ काम छौं ओकरा केना पूरा करभौ
एक्है दम्में नैं पहाड़ॉे पर चढ़लोॅ जैथौं
एक्है दाफी नैं गीता ठो भी पढ़लोॅ जैथौं
जखनी जोगाड़ लाग्हौं, आगू के रस्ता नाप्हौ
आगू जों भाङठे मिल्हौं देखी के तों नै काँप्हौ

फूल तोडै में तेॅ काँटों गड़बे करथौं
गलती होला पर चाँटोॅ तेॅ पड़वे करथौं
शह जानना छौं तेॅ तनि हेराय तेॅ लेॅ।बड्डी।

केना केॅ सकभौ बिना पेट में दाना देने
केना केॅ पैभौ कुछु बिना आपनोॅ गमैनें
बिना तोरोॅ कानने आरो बिना तोरोॅ हँसने
दुनियाँ नैं पतियैथों बिना तोरोॅ खंसने
मदौटी तभैं जबेॅ कखनू नैं हार्हौ
रस्ता के बाधा केॅ हंस्सी-हंस्सी टार्हौ

मंजिल खोजै में बल्हौं देरी नैं लगावोॅ
कटि टा जिनगी छौ, जत्तेॅ जल्दी पाबोॅ
बड्डी अनाड़ी छोॅ तनि फेराय तेॅ ले
बड्डी काम करने छोॅ तनि जिराय तेॅ लेॅ।