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तम्सील/ फ़राज़

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तम्सील [1]

कितनी सदियों के इन्तज़ार के बाद
क़ुर्बत-ए-यक-नफ़स[2] नसीब[3] हुई
फिर भी तू चुप उदास कम-आवेज़[4]

ऐ सुलगते हुए चराग़ भड़क
दर्द की रौशनी को चांद बना
कि अभी आंधियों का शोर है तेज़

अप पल मर्ग-ए-जावेदां[5] का सिला[6]
अजनबीयत[7] के ज़हर में मत घोल
मुझको मत देख मगर आँख तो खोल

शब्दार्थ
  1. उपमा
  2. घनिष्टता
  3. भाग्य से मिली हुई
  4. मिलने-जुलने से कतराने वाला (of reserved nature)
  5. हमेशा क़ायम रहने वाली मृत्यु
  6. फल, बदला
  7. अनजानापन