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तम तै दिये रै कमेर्यो मार लूटेरे लेगे माल थारा / जयसिंह

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तम तै दिये रै कमेर्यो मार लूटेरे लेगे माल थारा
 
सब कुछ करता भूखा मरता हो रह्या सै लाचार
धोती कुड़ता तेरा पाट रहा घर आळी की सलवार
थारा लूट लिया रोजगार होगे इनके पौ बारा
 
कोय जाट कोय ब्राह्मण वाल्मीकि कोय सुनार
कोय हिन्दू कोय मुसलमान कोय ईसाई सरदार
कोय ठाकुर कोय चमार एका दिया तोड़ म्हारा
 
लूटेर्यां कै सूत आवै थारी पाटंग टूट विचार
सब तरियां की छूट दे इननै या भ्रष्ट बणी सरकार
इन नै नां मेहनतकश तै प्यार शोषण कर रहे रोज थारा
 
कट्ठे होल्यो दुश्मन टोहल्यो जब जावैगी पार
हक की खातर कटण मरण नै रहो 24 घण्टे त्यार
मत रहो ‘जयसिंह‘ ताबेदार मशवरा लियो मान म्हारा