भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

तारे / बालकृष्ण गर्ग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

चंदा-सूरज, दोनों हैं यदि
गोल-गोल लड्डू प्यारे।
झुंड चिटियों औ’ चीटों के
हैं फिर तो नन्हें तारे।

[रचना : 14 मई 1996]