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तुझ मुख का यो तिल देखकर लाले का दिल काला हुआ / वली दक्कनी

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तुझ मुख का यो तिल देखकर लाले का दिल काला हुआ
तुझ दौर-ए-ख़त सों तौक़ ज्‍यूँ महताब पर हाला हुआ

मस्‍ती मनीं महशर तलक कौनैन को बिसरा है वो
जो तुझ नयन के जाम सों मद पी के मतवाला हुआ

काजल नयन को देख कर बोले हैं यूँ जादूगराँ
उश्‍शाक़ की तस्ख़ीर कूँ यूँ सहर-ए-बंगाला हुआ

ग़म्‍जाँ की फ़ौजां बाँधकर आए हैं रावत नैन के
हर मू पलक का हाथ में उनके सो जूँ भाला हुआ

जलता है दोज़ख़ रात दिन तेरे जले के रश्‍क सों
मुश्‍ताक़ तेरे दरस का जन्नत सों निरवाला हुआ

सट नैन की शमशीर की ऊझड़ 'वली' के दिल उपर
तेरे शिकारिस्‍तान में यो नख़्वीर है पाला हुआ