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तुझ में सैलाबे-बला थोड़ी जवानी कम है / मुनव्वर राना

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तुझ में सैलाबे-बला थोड़ी जवानी कम है
ऐसा लगता है मेरी आँखों में पानी कम है

कुछ तो हम रोने के आदाब[1] से नावाक़िफ़[2]हैं
और कुछ चोट भी शायद ये पुरानी कम है

इस सफ़र के लिए कुछ जादे-सफ़र[3]और मिले
जब बिछड़ना है तो फिर एक निशानी कम है

शहर का शहर बहा जाता है तिनके की तरह
तुम तो कहते थे कि अश्कों में रवानी कम है

कैसा सैलाब था आँखें भी नहीं बह पाईं
ग़म के आगे ये मेरी मर्सिया-ख़्वानी[4] कम है

मुन्तज़िर[5]होंगी यहाँ पर भी किसी की आँखें
ये गुज़ारिश है मेरी याद-दहानी[6] कम है

शब्दार्थ
  1. तौर तरीके
  2. अपरिचित
  3. सफ़र के लिए रसद
  4. शोक गाथा
  5. प्रतीक्षारत
  6. स्मरण-शक्ति