भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

तुन तुन तुन / विद्याभूषण 'विभू'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तुन-तुन तूँ-तूँ तुन-तुन-तुन,
जल्दी-जल्दी इसको धुन!

तकिया तोशक और रजाई,
भरना मुझको सुन ले भाई!

भरूँ गुदगुदा इससे गद्दा,
जिस पर लेटें बड़के दद्दा!

रुई हुई
छुई-मुई
बड़ी नरम
लेटे हम
धुन-धुन-धुन
तुन-तुन-तुन
आजा भैया बाजा सुन,
तुन-तुन तूँ-तूँ तुन-तुन।