भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

तुम्हारा अहसास / मनीष मूंदड़ा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तुम्हारे पास होने के अहसास भर से
जि़ंदगी की तमाम मुश्किलें, जैसे मुझसे दूर हो जाती हैं
सोचो गर तुम वाकई में मेरे साथ होते
तो मुश्किलों का क्या हश्र होता?

तुम्हारी यादों के सहारे होने के अहसास भर से
जि़ंदगी की सारी गिरहें, जैसे गुम-सी हो जाती हैं
सोचो गर तुम वाक़ई में मेरे साथ होते
तो जि़ंदगी का ताना बाना कितना ख़ूबसूरत होता

तुम्हारे साथ बिताए वह एक-एक पल के असर भर से
मेरे आज भी कितने सुलझे-सुलझे से लगते हैं अब
सोचो गर तुम मुझसे फिर आ मिल जाओ
तो मेरे आने वाले कल के रास्ते कितने सुहाने हो जायेंगे?