भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

तुम्हारे होने की / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पैरों तले धरती है
सिर पर खुला आकाश
है चारों तरफ खुली हवा
हवा कि जिस में
है तुम्हारे होने की सुगंध

कहीं भी जाऊं
तुम हो साथ मेरे
तब मुझे डर किस बात का !


अनुवाद : नीरज दइया