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तुम उचटती -सी एक नज़र डालो / मुनव्वर राना

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तुम उचटती-सी एक नज़र डालो
जाम ख़ाली इसको भर डालो

दोस्ती का यही तक़ाज़ा है
अपना इल्ज़ाम मेरे सर डालो

फ़ैसला बाद में भी कर लेना
पहले हालात पर नज़र डालो

ज़िंदगी जब बहुत उदास लगे
कोई छोटा गुनाह कर डालो

मैं फ़क़ीरी में भी सिकंदर हूँ
मुझपे दौलत का मत असर डालो

शब्दार्थ