भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

तू इन्तेज़ार में अपने यह मेरा हाल तो देख / सीमाब अकबराबादी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तू इन्तेज़ार में अपने यह मेरा हाल तो देख।
कि अपनी हद्देनज़र तक तड़प रहा हँ मैं॥

जलाले-मशरबेमन्सूर, ऐ मुआज़ल्ला।
किसी ने फिर न कहा आज तक ख़ुदा हूँ मैं॥