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तेरे दम से है रौनक़ घर मेरा आबाद है अम्मा / राजेन्द्र स्वर्णकार

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तेरे दम से है रौनक़ घर मेरा आबाद है अम्मा !
दुआओं से मुअत्तर है ये गुलशन शाद है अम्मा !

तेरे क़दमों तले जन्नत, दफ़ीने बरकतों के हैं
ख़ुदा अव्वल, तुम्हारा नाम उसके बाद है अम्मा !

किसी भी हाल में रब अनसुना करता नहीं उसको
किया करती जो बच्चों के लिए फ़रियाद है अम्मा !

न दस बेटों से मिलकर एक मां पाली कभी जाती
अकेली जूझ लेती है , तुझे लखदाद है अम्मा !

तेरी आंखों से गर आंसू बहे तो फिर क़यामत है
तेरा हर अश्क सूरज है, सितारा - चांद है अम्मा !

हमें खुशियां तू दे पल-पल, ज़माने भर के ग़म सह कर
अभागे हैं, मसर्रत में जिन्हें ना याद है अम्मा !

कमी राजेन्द्र क्या मुझको , भरे गौहर मेरे घर में
दुआ तेरी मेरे दामन में लाता'दाद है अम्मा !