भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

तोहर मउरी हवऽ नव लाख के / मगही

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

तोहर मउरी हवऽ नव लाख के।
जरा जइहऽ[1] काँटे-कुसे बच के॥1॥
नदी नाले से चलिहऽ सँम्हर के[2]
जरा लाड़ोसन्दर्भ त्रुटि: <ref> टैग के लिए समाप्ति </ref> टैग नहीं मिला</ref> से रहिहऽ सँम्हर के॥2॥

शब्दार्थ
  1. जाना
  2. सँभलकर