भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

थकना नहीं / येव्गेनी येव्तुशेंको

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हिम्‍मत रखना प्रमथ्‍यु की तरह
जब आग का रहस्‍य चुरा लाया था वह,
थकना नहीं खिलाते-खिलाते
बाज को अपना कच्‍चा कलेजा ।

थकना नहीं, बने रहना अथक,
बने रहना अदम्‍य और निर्बाध,
थकना नहीं भलाई करते रहने से
बने रहना विनम्र और उदार ।

दीवानेपन से थकना नहीं
राह दिखाते रहना अपने विवेक को
आत्‍मदहन करने देना जीवन को
पर जलना नहीं पूरी तरह ।

थकना नहीं उन अपेक्षाओं में
जो कभी वास्‍तविकता बन न पाएँगी,
थकना नहीं अपने कष्‍टों से
अनुभव करते रहना कष्‍ट दूसरों के ।

थकना नहीं उन प्रश्‍नों के उत्‍तर ढूँढ़ने से
जिनके उत्‍तर हैं ही नहीं,
इस निरुत्‍तरता में ही
निहित है उत्‍तर पहले से ।

जीवन के बाद होगा एक और जीवन,
पुन: आरम्भ होगा यौवन का,
अपनी अथक छाया से
जगाते रहना थके हुओं को ।