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दिल गया इज़्तिराब बाक़ी है / रवि सिन्हा

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दिल गया इज़्तिराब[1] बाक़ी है 
गोया क़िस्सा जनाब बाक़ी है

अर्ज़े-उल्फ़त[2] पे जश्न हो जाए
गरचे उनका जवाब बाक़ी है 

ख़ाक रक़्सां[3] है इस बियाबाँ में 
चश्मे-बातिन[4] सराब[5] बाक़ी है

मेरी आँखों के जागने पे न जा
मेरी आँखों में ख़्वाब बाक़ी है 

फ़िक्र उनको है रोज़े-महशर[6] की 
मुझको ख़ुद से हिसाब बाक़ी है 

शब्दार्थ
  1. बेचैनी (restlessness)
  2. प्रेम निवेदन (propositioning love)
  3. नाचता हुआ (dancing)
  4. अन्दरूनी आँख (inner eye)
  5. मरीचिका (mirage)
  6. क़यामत (day of final reckoning), आख़िरी हिसाब-किताब का दिन