भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

दिल धड़कता है कि तू यार है सौदाई / 'फ़ुगां'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

दिल धड़कता है कि तू यार है सौदाई का
तेरे मजनूँ को कहाँ पास है रुसवाई का

बर्ग-ए-गुल से भी कम अब कोह-ए-ग़म उस ने जाना
ये भरोसा तो न था दिल की तवानाई का

कीजिए चाक गिरेबाँ को बहार आई है
ज़िक्र बे-लुत्फ़ है याँ सब्र ओ शकेबाई का

सर्व साबित-क़दम इस वास्ते गुलशन में रहा
नहीं देखा कभी जलवा तेरी रानाई का

ज़ोर मंज़ूर-ए-नज़र तो तू ‘फ़ुग़ाँ’ रखता है
मैं तो बंदा हूँ तेरी चश्म की बीनाई का