भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

दीमक और दिन रात / शीन काफ़ निज़ाम

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कहाँ-कहाँ से
बटोरते फिरोगे
इबारतें-
बदबू पर बंधते नहीं बांध
सायों की सय्याहत में
दीमकों-से
चाटते रहोगे दिन रात
कब तक?

मेरी मानो
ख़ामोशी के ख़ार चुनो
चुपके से जीओ और
चले जाओ!