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दुर्भाग्य / बाद्लेयर / मदन पाल सिंह

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सिसिफ़[1] ! यन्त्रणा और उपेक्षा का अभिशप्त बोझ उठाने के लिए
हमें तुम्हारी सहनशक्ति की ज़रूरत होगी ।
और कला में डूबकर लगातार कार्य करने के लिए
तुम्हारे साहस की।
भले ही कला-कर्म में हमारे हृदय मग्न हों !
पर कला के अन्तहीन पथ पर
जीवन कुछ ही दूर जाकर तो रुक जाता है ।

यहाँ भव्य क़ब्रों से दूर
भूले-बिसरे कच्चे क़ब्रगाह की ओर
जैसे मेरा हृदय एक मातम के दुखी ढोल की तरह
अन्तिम विदा के काफ़िले में घोर बज रहा है ।

देखो, यहाँ कितने मानस-पुत्र दफ़न हैं
घोर उपेक्षा के कफ़न से ढके
विस्मृतियों की क़ब्र में बन्द,
खुदाई और कुदालों से दूर,
उन्हें कौन जानता है ?
कोई भी तो नहीं ।

यहाँ कितने फूल खिले
दुख में भी अपनी मीठी-सी ख़ुशबू फैलाकर
अकेले-अनजाने-आवारा फूलों की तरह
यादों से भी दूर
गहन एकान्त में समा गए।

अंगरेज़ी से अनुवाद : मदन पाल सिंह

शब्दार्थ
  1. यूनानी मिथक कथाओं के अनुसार एक राजा, जिसे देवताओं ने एक ही शिलाखण्ड को बार-बार ऊपर ले जाने की सज़ा दी थी