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दूध और भोजन मिलै खाण नै नहाण नै ताता पाणी / मेहर सिंह

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वार्ता- सज्जनों उधर रानी अम्बली सौदागर के जहाज में है। सौदागर रानी अम्बली पर अपना वासना का जाल फेंकना चाहता है उसे नये नये प्रलोभन देता हुआ क्या कहता है-

दुःख नै छोड़ रैह नै सुख मैं बणज्या मेरी सेठाणी
दूध और भोजन मिलै खाण नै नहाण नै ताता पाणी।टेक

दस ग्यारहा दासी ल्याद्यूं टहल बजाणे आली
सांग तमासें फिलम दिखा द्यूं रण्डी गाणे आली
हंस खेल मन रिझाणे आली बोलै रसीली बाणी।

एक एक मन मैं इसी आवै जणुं के के चीज खुवाद्यूं
मेरी हाजर रहै ज्यान तेरा जी चाहवै वो मंगवाद्यूं
नई नई पोशाक सिमाद्यूं दिये साड़ी गेर पुराणी।

किसै किस्म की काली ना द्यूं ला द्यूंगा जी तेरा
ओढ़ पहर जब सिंगरैगी जी उमंगैगा मेरा
तूं सेठाणी मैं पिया तेरा लिए बणा अदा कटखाणी।

कहै लखमीचन्द के ल्याया के लेज्यागा कोए दिन की चान्दणी हो सै
मेहर सिंह की हाथ जोड़ कै गरुआं तै बन्दगी हो सै
थोड़े दिन की जिन्दगी हो सै समय आवणी जाणी।