भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

दोनूं टंक पाणी-सी दाळ सांवरिया / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

दोनूं टंक पाणी-सी दाळ सांवरिया
समझलै आ सांस हुई गाळ सांवरिया

क्यूं दोरो हुवै सोध-सोध सीधी सड़क
पग-पग छळछंदां रो जाळ सांवरिया

जणै-जणै रै आंसुवां सूं थनै कांई
तूं तो थारा टाबर पाळ सांवरिया

आखरां रै ओग सूं बदळ सकै दुनिया
आं बातां नै आगड़ी बाळ सांवरिया

चळू भर हेत खातर जुगां लग भटकणो
अपणायत रो है अठै काळ सांवरिया