भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

दो ओळियां पछै / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आखै जंगळ री कलम बणा
सातूं समंदरां री ले स्याही
धरती रो कागद करियो
            म्हैं ई

आ सोच
हरि गुण अणंत है
मांड-मांड थक जासूं

पण देखो
दो ओळियां मांड
सोच-सागर में डूब्यो-
अबै कांईं लिखूं ?
………….?