भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

धरती का जीवन / धीरेन्द्र अस्थाना

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

नदी के कूल में,
करती अठखेलियाँ;
जाने कहाँ लीन हो गईं
वो अल्हड़ उर्मियाँ!

पूनम के चाँद की
वो शीतल चांदनी
रात रानी की
मादक महक;
पपीहा का चिर
'पी कहाँ ' का स्वर,
न जाने कहाँ
विलीन हो गया!

सिक्के ढालने वाले
कल कारखानों का
कर्ण विदारक शोर;
और इनसे विसर्जित
विषैला रसायन;
जीवन को कर
अशांत और विषाक्त!
कर दिया रिक्त और
सिक्त निस्त्रा को;

धूमिल हो गयी धुएं से
वो चांदनी रातें और
उजड़ गये धरती का
श्रृंगार करने वाले;
उपवन और नभचर!
कितना हो गया परिवर्तित
इस धरती का जीवन!