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ध्यान लगा कै देख्या तै एक हूर तला पै लेटी देखी / मेहर सिंह

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नहर के कंठारे पै सारस केसी जोट निराली देखी
ध्यान लगा कै देख्या तै एक हूर तला पै लेटी देखी।टेक

नार थी जणुं चन्दा की उनिहार
रूप जणुं बिजली की चमकार
होली जोड़ त्यौहार जणु कातिक जिसी दिवाली
जणुं लक्ष्मी पुजण खातिर जोत सेठ नै बाली
चिरमा उंगली मुंगफली सी एक इंच तै मोटी देखी।

फैसन बुरा आज और कल का
सचमुच गाहक मर्द के दिल का
एक लाल दुपट्टा मलमल का जम्फर कढ़वां जाली
जनुं जंगल में ओस चाटती फिरती नागण काली
कोए बालक बच्चा कोन्या हूर खड़ी एकली पोटी देखी।

नार भर री सै खुब उमंग में
बाकी ना सै एक एक अंग में
ना मर्द दिखता संग में क्यूंकर उमर काटती बाली
घोड़ी धन धरती बीर ने चाहिए घणी रुखाली
नाजुक थी एक सार छूट मनै वा ऐडी तै चोटी देखी।

कहै मेहर सिंह सुर बिन किसा राग
नमक बिना सुना भोजन साग
यू काया बाग फलया ना करता बिन माली
या सिचें बिन तुरत सूख ज्या डाली
माणस नै दे तुरत मार नैनां की घूरईसी खोटी देखी।