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नए साल की क़समें / शुन्तारो तानीकावा / अशोक पाण्डे

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क़सम खाता हूँ दारू और सिगरेट नहीं छोड़ूँगा
क़सम खाता हूँ जिनसे मैं नफ़रत करता हूँ, उन्हें नहला दूँगा नीच शब्दों से
क़सम खाता हूँ सुन्दर लड़कियों को ताका करूँगा
क़सम खाता हूँ हँसने का जब भी उचित मौक़ा होगा
खूब खुले मुँह से हँसूगा
सूर्यास्त को देखूँगा खोया-खोया
फ़सादियों की भीड़ को नफ़रत से देखूँगा
क़सम खाता हूँ
दिल को हिला देने वाली कहानियों पर रोते हुए भी सन्देह करूँगा
दुनिया और देश के बारे में दिमाग़ी बहस नहीं करूँगा
बुरी कविताएँ और अच्छी कविताएँ लिखूँगा
क़सम खाता हूँ समाचार-पत्र सम्पादक को नहीं बताऊँगा अपने विचार
क़सम खाता हूँ
अन्तरिक्ष-यान में चढ़ने की इच्छा नहीं करूँगा
क़सम खाता हूँ क़सम तोड़ने का अफ़सोस नहीं करूँगा
— इसकी गवाही में हम दस्तख़त करते हैं !

अँग्रेज़ी से अनुवाद : अशोक पाण्डे