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नज्रे-बानी / शीन काफ़ निज़ाम

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मैं औराक़े-हैरानी[1] में
इक साया गदले पानी में

मुश्किल आई आसानी में
है सारे मंज़र पानी में

ढूंढें फिर होने का मतलब
अब आयाते-इम्कानी[2]में

सुबहे-अज़ल[3] से मैं बैठा हूँ
इक बेनाम परेशानी में

देखो कितनी आबादी है
मेरी ख़ानावीरानी[4] में

कौन बताये क्या कैसा है
है सब कुछ बहते पानी में

पानी में पानी होता है
प्यास नहीं होती पानी में

मैं उस के दिल में रहता था
अब तो हूँ बस पेशानी में

शब्दार्थ
  1. चकित करने वाले पृष्ठ
  2. सम्भावना के श्लोक
  3. प्रारंभिक सुबह
  4. भाग्य हीनता