भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

नदिया तीरे / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


नदिया तीरे
बैठके गुमसुम
सिर झुकाए
सिर्फ लहरें गिनें
औरों की सुनें
होकर गुमसुम
हम क्यों भला,
अपनी कुछ कहें
सिर ऊँचा हो
तुम्हारा कर गहें
आगे ही बढ़ें
कामनाओं से लदी
तरणी लेके
भँवर पार करें
धारा में बहें
जो बाँट रहे पीड़ा
उनसे कहें-
साथ नहीं छोड़ेंगे
ये हाथ न छोड़ेंगे .