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नदी मेरे घर का पता भूल जाएगी-2 / इदरीस मौहम्मद तैयब

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मेरी याद हलकी है
दमकते हुए शहरों से
जो हासिल करते हैं अपनी ख़ुशियाँ
एक नई सुबह के मिमियाने से
पक्षियों की मानिन्द फुदकते
घास पर टहलते बच्चों के क़दमों से
फूलों की शरमाहट से
जब स्कूली लड़कियाँ पास से गुज़रती हैं
राह चलतों की शोखी और मस्ती से
कारखानों को जगाने जाते
मज़दूरों के उछाह से


रचनाकाल : 27 मार्च 1979

अंग्रेज़ी से अनुवाद : इन्दु कान्त आंगिरस