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नयां दिल्ली रेलवे स्टेशन / जय छांछा

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नेपाली लोग नई दिल्ली को नयां दिल्ली कहते हैं
 
गेरुआ वस्त्र पहने
एक हाथ में त्रिशूल लिए
और दूसरे हाथ में कमंडल उठाए
धीरे-धीरे चला आ रहा है एक अनजान व्यक्ति
रेलवे स्टेशन की ओर
उन्हें देख कर सोच रहा हूँ मैं
क्या मैं किसी मंदिर में हँ या फिर रेलवे स्टेशन पर ?

कलेजी रंग की शर्ट पहने
दाहनी बाँह पर अंक प्लेट बांधे
सिर पर सूटकेस और हाथों में झोला लटकाए
दबे पाँव चला आ रहा है एक अजनवी
रेलवे स्टेशन की ओर
और मैं सोच रहा हूँ
अभी मैं किसी गोदाम के आगे हूँ या फिर रेलवे स्टेशन पर ?

काफ़ी कठिन है पैर रखने की जगह पाना भी
ज़मीन पर ही सोए हैं लोग इधर-उधर
बिखरे हुए हैं लोगों के झोले और तुंबे
कतिपय दौड़ रहे हैं जल्दी-जल्दी
कतिपय बस घूम रहे हैं समय बिताने को
ऐसे अनियंत्रित और अनियोजित दृश्यों को देखकर सोच रहा हूँ मैं
यह कोई धर्मशाला है या फिर रेलवे स्टेशन ?

अपने घर जाने वाले / तीर्थयात्रा को निकले
घूमने के लिए निकले हुए / कहीं पहुँचने वाले
सज्जन और दुर्जन / भार उठवाने और उठाने वाले
सूट-बूट में सजे / नंगे पैर ही चलने को मज़बूर
अपनों को लेने आने वाले और विदाई के लिये आए हुए
भिन्न-भिन्न चेहरे, स्वभाव और लक्ष्य लिए हुए
सभी की उपस्थिति है यहाँ पर
इन सभी के बीच फँसा हुआ मैं
कहीं, इस भीड़ में ख़ुद खोकर
लावारिस तो नहीं हो जाऊँगा, क्या इसकी ज़िम्मेदारी कोई लेगा ?

इस गोलमालमय वातावरण में एकाकार होकर
निर्मग्न सोच रहा हूँ मैं इस वक़्त
नयां दिल्ली के रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खडा होकर ।

मूल नेपाली से अनुवाद : अर्जुन निराला