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नया घर नया कोहबर नया नींद हे / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

नया घर नया कोहबर नया नींद हे।
नया नया जुड़ल सनेह, सोहाग के रात, दूसर नया नींद हे॥1॥
सासु जे पइसि जगाबए, नया नींद हे।
उठऽ बाबू, भे गेल बिहान, सोहाग के रात, दूसर नया नींद हे॥2॥
सासु जे अइसन बइरिनियाँ, नया नींद हे।
आधि रात बोलथिन[1] बिहान, सोहाग के रात, दूसर नया नींद हे॥3॥
लाड़ो[2] जे जाइ जगाबए, नया नींद हे।
उठऽ[3] परभु, भे गेल बिहान, सोहाग के रात, दूसर नया नींद हे॥4॥
चेरिया जे अँगना बहारइ, नया नींद हे।
दीया[4] के बाती धुमिल भेल, अइसे[5] हम जानली बिहान।
सोहाग के रात, दूसर नया नींद हे॥5॥

शब्दार्थ
  1. बोलती है
  2. लाड़ली, दुलहन
  3. उठिए, जागिए
  4. दीपक
  5. इस तरह